जबलपुर: रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गुरुवार, 4 जून को एक बड़ी और कामयाब कार्रवाई करते हुए रेलवे टिकटों की अवैध कालाबाजारी (ब्लैकमेलिंग) करने वाले एक शातिर साइबर कैफे संचालक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरपीएफ की टीम ने आरोपी के पास से कुल 74 अवैध ई-टिकट जब्त किए हैं, जिनकी कुल बाजार कीमत लगभग 1 लाख 24 हजार रुपये आंकी जा रही है।

गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान 35 वर्षीय सुमित झा के रूप में हुई है, जो न्यू शोभापुर कॉलोनी का निवासी है। आरपीएफ ने मौके से उसका कंप्यूटर, मोबाइल फोन और कई अन्य डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में ले लिए हैं।

पर्सनल आईडी से आईआरसीटीसी की टिकटें बुक कर वसूलता था ज्यादा दाम

यह पूरी कार्रवाई आरपीएफ पोस्ट जबलपुर के प्रभारी राजीव खरब को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलते ही सब-इंस्पेक्टर (एसआई) योगेंद्र सिंह ने अपनी स्पेशल टीम के साथ शोभापुर स्थित ऑनलाइन शॉप पर अचानक छापेमारी कर दी और सुमित झा को हिरासत में ले लिया।

जांच और कड़ी पूछताछ में जो बातें सामने आईं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं:

  • आरोपी रांझी इलाके में 'सन साइबर कैफे' नाम से एक दुकान चलाता था।

  • व्यावसायिक तौर पर रेलवे टिकट बेचने का लाइसेंस न होने के बावजूद, वह अपनी 6 अलग-अलग पर्सनल आईआरसीटीसी (IRCTC) यूजर आईडी और एमपीऑनलाइन के जरिए धड़ल्ले से टिकट बुक कर रहा था।

  • वह जरूरतमंद और मजबूर यात्रियों से प्रति टिकट 50 से 100 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली (कमीशन) करता था।

74 अवैध टिकटों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड्स भी जब्त

आरपीएफ ने जब आरोपी के कंप्यूटर और डिजिटल रिकॉर्ड्स को खंगाला, तो वहां से कुल 74 अवैध ई-टिकट बरामद हुए। इनमें से 6 लाइव टिकट (जिन पर यात्रा होनी बाकी थी) थे, जिनकी कीमत 11,152 रुपये है। वहीं, 68 पुरानी टिकटें मिलीं, जिनकी कुल कीमत 1,13,397 रुपये थी। आरपीएफ ने कुल 1,24,549 रुपये की जब्ती बनाई है।

रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी सुमित झा टिकटों के बदले ग्राहकों से नकद पैसों के अलावा ऑनलाइन डिजिटल वॉलेट और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से भी पेमेंट लेता था। आरपीएफ ने अब इन सभी बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट मोड्स को अपनी जांच के दायरे में ले लिया है।

इस पूरी कार्रवाई के बाद आरोपी को जब्त किए गए कंप्यूटर सिस्टम के साथ आरपीएफ पोस्ट जबलपुर लाया गया। आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत अपराध क्रमांक 2160/26 दर्ज किया गया है। आवश्यक वैधानिक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को फिलहाल बंध पत्र (बॉन्ड) पर रिहा कर दिया गया है।